काबुली चना मे ऐसे होगी बम्पर पैदावारी Chana, Variety | Kabuli Chana Ki Kheti

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काबुली चना की खेती कैसे करें | Kabuli Chana Ki Kheti | Kabuli Chana

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काबुली चना भारत में उपयोग होने वाले सबसे उच्चतम रेसिपी में आता है इसी कारण इसकी लोकप्रियता आज भी सबसे ज्यादा है क्योंकि यह लगभग आधा से ज्यादा सब्जियों में उपयोग होने वाला अनाज है।

तो देसी चना और काबुली चना मे समानता देखें तो काबुली चना देसी चना से साइज में थोड़ा बड़े होते हैं और इसकी पैदावार लगभग 15 से 20 क्विंटल बैठती है।

Kabuli Chana ठंड के मौसम मे होने वाला फसल है जिसमें आपको स्प्रिंकलर विधि से सिचाई करनी पड़ती है और इसका बीज दर 70 से 75 KG हेक्टेयर के हिसाब से उपयोग करना पड़ता है।

Kabuli Chana का सबसे ज्यादा अच्छा रिजल्ट हम बलुई और दोमट मिट्टी (Soil) में देख सकते है तो चलिए हम काबुली चना की खेती का विस्तार से चर्चा करते हैं कि कैसे हम इसकी अच्छी उपज ले सकें।

काबुली चना की खेती कैसे करे (Kabuli Chana Ki Kheti)

बुवाई का समय (Gram Growing Time)

बुवाई का समय इसके लिए सबसे अच्छा अक्टूबर माह के पहला से दूसरा हफ्ता ही अच्छा है जोकि सीड ड्रिल मशीन से इसकी बुवाई (Buvai) करेंगे तो काफी अच्छा पैदावार हमको देखने को मिलता है।

क्योंकि Seed Drill मशीन में बीज एकदम पंक्ति तू पंक्ति पड़ता है। बुवाई के समय हमको खेत मे उचित नमी बनाए रखना बहुत पड़ता है।

Kabuli Chana बीज दर (Gram Seed Rate )

काबुली चना में बुवाई के समय बीज दर का काफी अच्छा ध्यान रखना पड़ता है तभी हम अच्छी पैदावारी ले सकते हैं तो इसके लिए सबसे अच्छा रहेगा जो की एक्सपर्ट की सलाह के हिसाब से 70 से 75 KG पर Hec. के हिसाब से बीज डालनी चाहिए।

Kabuli Chana Variety

काबुली चना लगाने से पहले किसानो को सबसे पहले तो इनकी Variety जाननी बहुत जरूरी है क्योकि अच्छी Variety ही अच्छी पैदावारी दे सकती है तो इसका कुछ प्रसिद्ध Variety मार्केट मे उपलब्ध है।

जिसमे से- पूसा शुभ्रा (BDG 128) गौरी, (GNG 1499 के), Kabuli 4, Pant Kabuli Chana 1, Pant Kabuli Chana 2, Kabuli Chana 101, GLK 28127 और Vllabh Kabuli Chana 1 ये सब Variety Kabuli Chana मे प्रसिद्ध है।

खाद एवं उर्वरक (Kabuli Chana Khad Urvarak)

Kabuli Chana मे खाद एवं उर्वरक का हमको Management इस तरह से करना पड़ता है। हमे अच्छी पैदावारी के लिए सामान्य दशा में प्राप्त करने के लिए 20 KG नत्रजन, 40 KG Phosphorus , 20 KG Potash और साथ मे 20 KG Sulfer  प्रति/h  उपयोग करना चाहिए।

खेत में सूक्षम तत्वों की कमी होने पर जिंक सल्फेट 25 KG Per/h तथा बोरान एवं मोलिब्डेनम कमी होने पर क्रमश: 10 किलोग्राम बोरेक्स पवडेर व 1.5 किलोग्राम अमोनिया माँलिब्डेट Per/ह की दर से प्रयोग करने पर काबुली चना के उत्पादन मेंअच्छी वृद्धि होती है |

सिंचाई (Chana ki Sichai)

काबुली चना में सिंचाई अच्छी पैदावारी के लिए काफी अहम रोल अदा कर दी है तो काबुली चना में बुवाई के समय हमको जमीन को नमी बनाए रखना पड़ता है।

तो इसी के चलते हमको सिंचाई लगभग 45 से 60 दिनों में करना पड़ता है और सिंचाई के लिए सबसे अच्छा फव्वारा विधि उपयुक्त होता है जिसमें हम स्प्रिंकलर से भी कर सकते हैं।

काबुली चना के रोग (Chana ke Rog)

काबुली चना में किसानों को सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है इसमें रोग निवारण की परेशानी आती है जो कि आप सामान्य जैविक तरीके से कर सकते हैं।

इससे पहले ऊपर मैंने खाद बताया है उसी तरह से भी उपयोग कर सकते हैं तो इसमें सामान्य रोग की बात करें तो सबसे ज्यादा देखा जाने वाला रोग है उकता रोग, धूसर फफूंद, चनी फली, दीमक और कटुवा रोग सबसे ज्यादा देखा जाता है। 

काबुली चना पैदावार (Kabuli Chana Production)

Kabuli Chana मे या कोई भी फसल हो उसकी पैदावारी सबसे ज्यादा मुख्य बात होती है क्योंकि कोई भी किसान चना को लगाने के बाद इसी का ही इंतजार करता है।

तो पैदावार की बात करें तो काबुली चना 15 से 20 क्विंटल की उपज देती है अगर थोड़ा फसल खराब हो जाए तो इससे थोड़ा नीचे भी आ जाता है लेकिन चना उतना नुकसान नहीं देता जितने कि हमको दूसरे फसल में देखने को मिलता है।

तो दोस्तों यह रही हमारे द्वारा इकट्ठी की गई जानकारी तो आपको कैसी लगी हमारे द्वरा दी गई ” Kabuli Chana Ki KhetiHindi मे जानकारी  हमें कमेंट में जरूर बताएं और हो सके तो हमारे अगले किसान वीरो के साथ जरूर शेयर करें।

आपका प्रेम पूर्वक धन्यवाद,

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