चना की खेती में पैदावारी बढ़ाये [यूरिया खाद, वैरायटी, सिंचाई] | Chana Ki Kheti Hindi Production

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Chana Ki Kheti Hindi Production

Chana Ki Kheti Hindi Production यूरिया खाद वैरायटी सिंचाई, चने की फसल में यूरिया कब देना चाहिए? का प्रयोग डालें जानकारी सबसे अच्छी वैरायटी कौन सी है, कैसे करें kaise karen कितने पानी देना चाहिए गोदरेज डबल टॉनिक कीटनाशक दवा बुवाई का समय कीटनाशक दवा pani kab dena chahiye kharpatwar ki dawai एक एकड़

चने की अच्छी पैदावारी कौन नहीं चाहता हर किसी की चाहत होती है कि हमारी फसल अच्छी से अच्छी पैदावारी दे। अभी हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको चने की अच्छी पैदावारी कैसे ले सकते हैं इसके बारे में बताने वाले ।

आपको बस कुछ सामान्य सी बातों का ध्यान रखनी होगी और आप जैसी खेती करते हैं वैसे ही करेंगे लेकिन हम आपको ऐसा तरीका बताएंगे की आपकी Chana ki Paidawar मे कुछ ना कुछ बढ़ोतरी जरूर होगी क्योंकि यह हमारा 2 साल का अनुभव रहा हैं।

Chana ki Production में सबसे ज्यादा अहम रोल पानी देने का ही होता है उसके बाद खाद देने का समय आता है लेकिन आप खाद और दवाई कितनी भी सही तरीके से डाल ले अगर आपका पानी देने का समय सही नहीं रहेगा तो निश्चित ही आप की पैदावारी प्रभावित होगी, तो चलिए अब जानते हैं कि कैसे हम चने की पैदावारी को बढ़ा सकते हैं।

चना की खेती में पानी कब देना है

चने की अच्छी पैदावारी के लिए सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण रोल प्ले करती है इसे हम आपको पहले ही बता चुके हैं।

चने की फसल में हमारा सबसे पहला सिंचाई फसल लगाने के समय ही होता है तो इस समय आप कैसे भी पानी दे सकते हैं। आप बुवाई से पहले दें या बाद में दे आपको एक बार देना होता है।

फसल लगने के बाद जैसे ही आप की फसल 20 से 25 दिनों की हो जाती है जिसमें चना हल्का काला होने लगता है तो उसी समय आपको दूसरी पानी देना है क्योंकि इस समय पानी देने से चने की ग्रोथ सबसे ज्यादा होती है।

अब आप को ध्यान रखना है तीसरा पानी देते समय आपके चने में फूल आने का समय होना चाहिए जैसे ही आप के चने के कुछ पौधों में फूल दिखने लगे आप उस समय सिंचाई कर दें लेकिन यहां पर वैज्ञानिक खेती कहती है कि फूल आने पर चने मे पानी नहीं देना चाहिए लेकिन हमने कुछ वर्षों से यह अनुभव किया है कि यह तरीका बिल्कुल भी कारगार नहीं होता है इसलिए आप चने में फूल के समय ही पानी दे।

अब हमने chana में तीसरा पानी दे दिया है अब आपको तब तक पानी नहीं डालना है जब तक चने में फल आने ना लगे क्योंकि अगर फल आने के समय अगर आप पानी डालते हैं तो चने में फल अच्छे से नहीं लगेगा उसके फलो में सिर्फ हवा भर जाएगा जिससे पैदावारी अच्छी नहीं होगी।  

आपकी चने में लगभग 70% तक फल आने के बाद ही चौथा सिंचाई करें तो इस तरह से आप सिंचाई का तरीका अपना सकते हैं जो कि काफी कारगर तरीका है आप इसे एक बार जरूर अपना के देख सकते हैं रिजल्ट आपको जरूर मिलेगा

बीमारी की रोकथाम

Chana Ki Kheti में सबसे बड़ी परेशानी बीमारी का हो जाना होता है तो यहां पर कुछ आसान तरीके से हम बीमारी की रोकथाम कर सकते हैं जिससे हमारी पैदावारी प्रभावित ना हो।

तो इसके लिए हम कीटनाशक, फफूंदी नाशक और टॉनिक का उपयोग एक साथ एक ही पंप में करेंगे।

कीटनाशक मे Emapectin Benzoate 5KG 90 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग करना है

फफूंदी नाशक के लिए आप Nativo (Bayer) Amistar Top, Adexar (BASF) 120 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग करेंगे।

टॉनिक हम हम Fantac (Coramandal) का उपयोग 120ml एकड़ के हिसाब से करेंगे टॉनिक का उपयोग हम तभी करेंगे जब हमारी खेत में नमी हो क्योंकि यह टॉनिक नमी में ही काम करता है ।

इस टॉनिक से पौधों को अच्छी मात्रा में अमीनो एसिड और विटामिन की पूर्ति हो जाती है यह डायरेक्ट पौधों में Absorb में हो जाता है ।

इसके लिए उतना पानी की जरूरत भी नहीं पड़ती तो यह तो हो गई आप के खेत में सिर्फ नमी हो या पानी की कमी हो तब इस Tonic का उपयोग करना है।

अगर आपकी खेत में पानी की मात्रा ठीक-ठाक है तब आप Double जो गोदरेज का आता है इसका उपयोग करेंगे जिसकी मात्रा होगी 2 से 3ml प्रति लीटर पानी के हिसाब से करना है जिससे पौधों की परागण नली बढ़ती है।

एनपीके खाद (NPK)

जब हम कीटनाशक और टानिक का उपयोग कर लेते हैं उसके 15 दिन बाद आपको पौधों मे एनपीके 00:52:34 उपयोग करना है जिसकी मात्रा है 500 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से उपयोग कर सकते हैं।

तो किसान साथियों चने की अच्छी पैदावारी के लिए आप इन तरीकों का उपयोग कर सकते हैं जो कि एकदम आसान है कोई मुश्किल काम नहीं है और रिजल्ट आने पर हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताने का प्रयास करें और रिजल्ट सही आता है तो यह जानकारी अगले किसान साथियों के साथ जरूर शेयर करें। 

आपका प्रेम पूरा धन्यवाद,

हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पूरी तरह से सही होने का दावा नहीं करता इसीलिए एक बार कृषि सलाहकार से सलाह भी जरूर लेनी चाहिए क्योकि हमारे द्वारा दी गई जानकारी सिर्फ Educational Purpose के लिए है ।

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